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भा.प्रौ.सं. के नियम एवं विनियम


नई अवरस्नातक पाठ्यचर्या (2007-से आगे) के संक्षप्ति विवरण
द्वि-उपाधि कार्यक्रम (एम.टेक.+एम.फिल +पीएच.डी.) का स्वरूप
पीएच.डी./ एम.टेक/ एम.फिल./ एम.डेस/ ए.एस. / डी आईआईटी./ बी.टेक./ द्वि-उपाधि (बी.टेक+एम.टेक.) के लिए शोधग्रंथ/ शोध प्रबंध तैयार करने के मार्गदर्शी सिद्धांत
एम.एस.सी. , पीएच.डी , द्वि-उपाधि कार्यक्रम का स्वरूप
पीएच.डी. कार्यक्रम के नियम एवं विनियम 28 जून 2011 को अद्यतन किया गया
एम.टेकh. / एम.फिल. / एम.डेस . / एम.मैनेज़मेट . / डी आईआईटी कार्यक्रम कार्यक्रम के नियम एवं विनियम 28 जून 2011 को अद्यतन किया गया
बी.टेक/द्वि-उपाधि /एम.एस. नियम 2006 बैच तक
बी.टेक/द्वि-उपाधि /एम.एस. नियम 2007 बैच से
संकाय सलाकार हेतु पंजीयन सूचना -बी.टेक
संकाय सलाकार हेतु पंजीयन सूचना -द्वि-उपाधि
नियम सारांश
नियम लागू होने के संबंध में सूचना
ब्रांच ( विद्याशाखा) बदलने के नियम

एक सीमित संख्या में विद्यार्थियों को दाखिला के समय उन्हें आबंटित शाखा को बदले की अनुमति दी जाती है। इस प्रकार का बदलाव प्रथम दो सत्र के अंत में विद्यार्थी के संचयी निष्पादन सूचकांक ( सी पी आई) के आधार पर होता है। शाखा परिवर्तन करनेवाले नियमों के नियमन कुछ जटिल हैं और सही स्थिति के लिए शैक्षिक कार्यालय से सम्पर्क किया जा सकता है। निम्नांकित एक साधारण गाइड लाइन है। हर वर्गों में शाखा बदलाव सख्ती से योग्यता के अधार पर होता है। इसका अर्थ यह हुआ कि अपने पसंद की विद्याशाखा बदले की अनुमति, इस प्रकार बदलाव के नियमन करनेवाले नियमों को लगाए जाने के कारण एक विद्यार्थी को नहीं दी जाती है तो इस प्रकार के वंचित विद्यार्थी से कम सी पी आई वाले अन्य दूसरे विद्यार्थी को उस विशेष विद्याशाखा में बदलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

एक शाखा परिवर्तन करने पर भी कुछ प्रतिबंध हैं। शाखा परिवर्तन के परिणामतः इस परिवर्तन के होने के पहले विद्यार्थियों की जितनी संख्या पंजी में है, वह घटकर 85% प्रतिशत से संख्या कम नहीं होनी चाहिए। इसी तरह शाखा की संख्या उस शाखा के लिए स्वीकृत संख्या से अधिक नहीं होनी चाहिए । इन नियमों का प्रभाव यह है कि उस शाखा में बदलाव लेना कठिन है जिनकी स्वीकृत संख्या कम है। पुनः इस प्रकार के प्रतिबंध के कारण इस तरह का विद्यार्थी इस प्रकार की श्रेणी से शाखा परिवर्तन की इच्छा करता है , वह योग्यता के मानदण्ड के कारण अन्य पूरे विद्याशाओं के विद्यार्थियों के लिए ब्लॉक कर शाखा परिवर्तन से उन्हें वंचित कर देता है। आरक्षित वर्ग के विद्यार्थियों से शाखा परिवर्तन के अनुरोध के हर मामले को अलग से विचार किया जाता है।

पंजीयन नियम

हरेक सत्र के प्रारंभ में पाठ्यक्रम के लिए पंजीयन कराना सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है। इस उद्देश्य से विद्यार्थी को एक पाठ्यक्रम पंजीयन प्रपत्र ( सी आर एफ) भरना होगा । हरेक विद्यार्थियों के एक सलाहकार संकाय होते हैं जो विद्यार्थी को सलाह देते हैं कि वह यह पाठ्यक्रम ले। सामान्यतः एक विद्यार्थी को एक सत्र में कम से कम 28 क्रेडिट अर्जित करना होता है। अनु.जा/जन जाति तथा DASA विद्यार्थियों के लिए न्यूनतकम अपेक्षाओं में 22 क्रेडिट तक की छूट दी जाती है। ऐसे विद्यार्थी जो उपर्युक्त न्यूनतम क्रेडिट प्राप्त नहीं कर पाते हैं अथवा विगत सत्र से पाठ्यक्रम को ब्लाक किए हैं, से निर्दिष्ट सत्र के लिए कुछ निर्धारित पाठ्यक्रम छोड़ने की अपेक्षा होगी । अच्छे अंकवाले विद्यार्थी को ऐसे पाठ्यक्रम के ऑडिट करने की अनुमति होगी जो उनके निर्धारित पाठ्यक्रम में नहीं हैं। इस प्रकार के पाठ्यक्रम या तो अवर स्नातक या स्नातकोत्तर कार्यक्रम के हो सकते हैं। इस प्रकार के ऑडिट के लिए संबंधित अनुदेशक की सहमति और सलाहकार संकाय की सम्मति की आवश्यकता होती है।

उपस्थिति नियम

कक्षा में उपस्थिति अनिवार्य है। 80% से कम उपस्थिति वाले विद्यार्थी को सत्रांत परीक्षा में शामिल होने से रोका जा सकता है । उसे XX ग्रेड दिया जाएगा , इसके कारण जब उसे पुनः यह पाठ्यक्रम मिलता है तो उसे पुनः पंजीयन कराने की आवश्यकता होगी।

पाठ्यक्रम संरचना एवं मूल्यांकन

बी.टेक/समाकलित एमएससी / द्वि-उपाधि
उपर्युक्त किसी भी पाठ्यक्रम में नामांकित सभी विद्यार्थियों को प्रथम सत्र में एक सामान्य शैक्षिक कार्यक्रम (लिंक) पढ़ना होता है। द्वितीय सत्र में अधिकांशतः सामान्य पाठ्यक्रम होते हैं, सिवाय इसके कि एक विद्यार्थी को विभागीय परिचय पाठ्यक्रम और दूसरा विभागीय वैकल्पिक पाठ्यक्रम अवश्य लेना होता है। विद्यार्थियों की एक सीमित संख्या को प्रथम वर्ष में उनके निष्पादन के आधार पर उन्हें उनकी शाखा बदले की अनुमति मिलती है ।विद्यार्थियों के द्वारा लिया गया हरेक पाठ्यक्रम ( एन सीसी / एन एस ओ अथवा व्यवहारिक प्रशिक्षण जैसी अन्य आवश्यकताओं को छोड़कर) के साथ अंक जुड़ा हुआ है। एक घंटे का सिद्धांन्त पाठ्यक्रम में ( व्याख्यान अथवा ट्यूटोरियल ) सामान्य तौर पर दो क्रेडिट मिलते हैं वहीं एक घंटे के प्रयोशाला पाठ्यक्रम में एक क्रेडिट मिलते हैं। एक पाठ्यक्रम संरचना 2-1-0-6 का अर्थ है कि 2 व्याख्यान के समय हैं , एक ट्यूटोरियल का समय हैं और शून्य (०) प्रयोगशाला का समय इससे जुड़ा है। इस प्रकार के पाठ्यक्रम के कुल क्रेडिट 2x2+1x2+0x1 = 6 हैं। इसी तरह 0-1-3-5 संरचना का अर्थ है कि इसमें 2 व्याख्यान और तीन प्रयोगशाला का समय इससे जुड़ा है। पाठ्यक्रम की क्रेडिट संरचना संबंधित विभाग के वेब पेज पर देखा जा सकता है।

पाठ्यक्रम अनुदेशक को मूल्यांकन करने के तरीके पर निर्णय करने की अत्यधिक स्वंत्रता देते हुए संस्थान सतत् मूल्यांकन प्रणाली को अपनाता है। मगर एक प्ररूपी सिद्धांत पाठ्यक्रम में 30 अंक की एक मध्य सत्र परीक्षा, एक व दो क्यूज़ अथवा 20 अंक की लघु परीक्षा और अंत में 50 अंक की सत्रांत परीक्षा होगी। इस तरह प्राप्त अंकों को विद्यार्थियों के सापेक्षिक ( और कभी -कभी सम्पूर्ण पर ) निष्पादन के आधार पर एक अक्षर ग्रेड में बदल दिया जाता है। इन ग्रेडों को 10 के पैमाने पर रखा जाता है जिसमें श्रेष्टतम AA होता है और FF फेल ग्रेड होते हैं। हरेक अक्षर ग्रेड में इसके साथ एक पोइंट जुड़ा होता है, जो निम्नवत हैंः-

ग्रेड GradesAAABBBBCCCCDDDFFFR
पोइंट109876540 फेल ग्रेड , पुनः परीक्षा के लिए पात्र होता है। 0 फेल ग्रेड को पाठ्यक्रम पुनः करना चाहिए

P ( पास) NP ( पास नहीं) Au ( परीक्षण पाठ्यक्रम) जैसे अन्य ग्रेडों से कोई भी ग्रेड पोइंट जुड़ा नहीं होता है। किसी एक विशेष सत्र में एक विद्यार्थी के निष्पादन को सत्र निष्पादन सूचकांक से मापा जाता है, जो कि एक सत्र में लिए गए सभी पाठ्यक्रमों में प्राप्त ग्रेड का औसतन होता है अधिकतम 10 के पैमान पर होता है। उदाहरण के लिए मान ले कि विद्यार्थी एक 8 क्रेडिट पाठ्यक्रम से लिए, चार 6 क्रेडिट पाठ्यक्रम क्रेडिट के लिए , एक 5 क्रेडिट पाठ्यक्रम के लिए और एक 3 क्रेडिट पाठ्यक्रम के लिए अर्थात कुल 40 क्रेडिट के लिए पंजीकृत है। इन पाठ्यक्रमों में यदि वह क्रमशः AB, BB, BC, CC, AB, AA, CD ग्रेड प्राप्त करता है उनकी SPI की गणना निम्नवत की जाएगी।

SPI = (9x8 + 8x6 + 7x6 + 6x6 + 9x6 + 10x5 + 5x3)/40= 317/40 = 7.92
SPI की गणना दो दशमलव अंक तक होती है।

ठीक इसी तरह से एक सत्र मेंं विद्यार्थी के द्वारा लिए गए सभी पाठ्यक्रमों जिनके अंतिम परीक्षा परिणाम उपलब्ध हैं, में विद्यार्थी के निष्पादन पर विचार करते हुए उनकी संचयी निष्पादन सूचकांक की गणना होती है।

एम एससी ( विज्ञान स्नातकोत्तर कार्यक्रम )

विज्ञान स्नातकोत्तर कार्यक्रम में क्रेडिट संरचना और मूल्यांकन की पद्धति वही होती है जो बी.टेक के लिए उल्लेख किया गया है।

बी.टेक./ एम.एससी परियोजना :

निर्धारित पाठ्यक्रम के अलावा बी.टेक. व एम टेक के विद्यार्थी को विभाग के द्वारा स्वीकृत पर्यवेक्षक के मार्गदर्शन में एक वर्ष का एक शोध निबंध लिखना होता है। ( एम.एससी. परियोजना के मामले में इसे "होम पेपर " कहा जाता है) परियोजना का मूल्यांकन दो चरणों में होता है, एक बार प्री फानल सत्र के अंत में आंतरिक परीक्षा मण्डल के द्वारा और अंतिम रूप में अंतिम सत्र के अंत में जिसमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई के बाह्यय परीक्षक भी उपस्थित रहते हैं । विशिष्ट रूप से इसमें 20 क्रेडिट होते हैं।

प्रयोगात्मक प्रशिक्षण :

हरेक विद्यार्थी को विभाग के अनुमोदन के अनुसार एक कारखाना, प्रयोगशाला, वर्क साइट अथवा एक संगठन में व्यवहारिक प्रशिक्षण के लिए जाना पड़ता है। यह प्रशिक्षण छटे सत्र के बाद या सतत रूप से या चौथे एवं छठे सत्र के बाद चार-चार सप्ताह के दो अलग -अलग हिस्सों में लिया जा सकता है। इस प्रशिक्षण के उपरांत मूल्यांकन एवं अनुमोदन के लिए विद्यार्थी को एक लिखित रिपोर्ट विभाग में जमा करना होता है। बी.टेक. उपाधि की अनिवार्य आवश्यकता के लिए एक पास (P) अथवा पास नहीं , बिना क्रेडिट का ग्रेड संलग्न करना होता है।







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